मंगलवार, 14 सितंबर 2021
ये अपशकुन तो नहींः घर में भगवान की मूर्ति खंडित होना, तस्वीर टूटना, प्रसाद गिरना
हर घर में पूजा होती है। भगवान की अलमारी भी होती है। हर व्यक्ति की भावनाएं भगवान से जुड़ी होती हैं। ऐसे में मंदिर की सफाई करते समय या हाथ लगने से अचानक भगवान की मूर्ति गिर कर टूट जाए या रखते समय लुढ़कर टूट जाए तो सबके मन में एक झटका सा लगता है। अरे कहीं अपशकुन तो नहीं हो गया। यही बात घर में लगी तस्वीर के अचानक गिरकर टूट जाने पर भी होती है। घर का हर शख्स सहम जाता है। कभी आप पंडित जी से प्रसाद ले रहे होते हैं और प्रसाद गिर जाता है। या हवन में पूर्णाहुति के समय नारियल छिटक जाता है। ऐसी तमाम घटनाएं हैं तो आस्थावान लोगों के मन को विचलित कर देती हैं।
चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होता। भगवान आपकी श्रद्धा और आस्था के भूखे हैं। आप उन्हें प्रेम से जो भोग लगाएंगे वह खा लेंगे। लेकिन किसी भी अच्छे कार्य को करते समय नकारात्मक विचार लाना गलत है। मन चंगा तो कठौती में गंगा। भगवान की मूर्ति अगर रखे रखे भी टूट गई है तो ये देखने की जरूरत है कि वह मूर्ति चटकी तो नहीं है। अगर पहले से चटकी मूर्ति टूट गई तो कुछ अपशकुन नहीं है। भगवान की मूर्ति हाथ लगने से लुढ़क गई तो कुछ अपशकुन नहीं है। पंखा चलाने से मंदिर का दिया बुझ गया तो कुछ अपशकुन नहीं है। दिये को जोत को ठीक करते समय इसी लिए कहा जाता है कि समानांतर दूसरा दिया जला देना चाहिए। ताकि अगर बुझ जाए तो मन में खराब विचार न आए।
असली चीज है भावना आपके मन में पाप नहीं है तो किसी हादसे के लिए पाप बोध भी नहीं लाना चाहिए। प्रसाद लेते समय गिर गया तो भी असावधानी है। पूर्णाहुति के समय सामग्री छिटककर बाहर गिरी तो भी कुछ गलत नहीं लेकिन बाहर गिरी सामग्री का पुनः इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसी तरह कोई तस्वीर टूट जाए तो इसमें भी परेशान होने की जरूरत नहीं है।
भगवान के प्रति आप अपना समर्पण बकरार रखें। मृत्यु और जीवन की डोर ईश्वर के हाथ है फिर आप किस बात से डर रहे हैं। भय को त्यागें ईश्वर में मन लगाएं जो होगा अच्छा ही होगा।
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