शुक्रवार, 24 दिसंबर 2021

बड़ी खबर यूपी में लागू हुआ कोरोना कर्फ्यू, मास्क हुआ अनिवार्य

Uttar Pradesh CM Yogi Adityanath देश के विभिन्न राज्यों में कोविड के मामलों में बढ़ोतरी के दृष्टिगत कल से प्रतिदिन, रात्रि 11 बजे से प्रातः 05 बजे तक प्रदेश में कोरोना कर्फ्यू प्रभावी रहेगा। हम आपकी सुरक्षा हेतु सभी आवश्यक कदम उठा रहे हैं। कोविड गाइडलाइंस का पालन करें। मास्क जरूर लगाएं।

यूपी चुनाव स्थगन अपील पर अनुराग ठाकुर का बड़ा बयान, वन नेशन वन टैक्स पर भी बोले


उत्तर प्रदेश में जीएसटी छापे पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर ने कहा है कि हमारा निरंतर प्रयास है कि इस देश में काम करने वाले लोगों को ईज ऑफ डूइंग बिजनेस मिले, हमने वन नेशन-वन टैक्स की दिशा में भी काम किया है। टैक्स चोरी करने वालों को बिल्कुल नहीं बख्शा जाएगा।
इसी के साथ उन्होने यूपी चुनाव स्थगित करने की इलाहाबाद हाई कोर्ट की अपील पर कहा भारत का चुनाव आयोग आदर्श आचार संहिता लगाता है, तो उन्हें तय करना होता है कि चुनाव कब होंगे: इलाहाबाद उच्च न्यायालय की पीएम और चुनाव आयोग की अपील पर केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर की प्रतिक्रिया

महाराष्ट्र सरकार कड़े प्रतिबंध की ओर बढ़ी, ओमिक्रॉन का खतरा

ओमिक्रोन प्रसार, क्रिसमस और नए साल के उत्सव को देखते हुए महाराष्ट्र सरकार कोविड के लिए नए प्रतिबंध / दिशानिर्देश जारी करने जा रही है। सीएम उद्धव ठाकरे की अध्यक्षता में कोविड टास्क फोर्स की कल की बैठक के बाद यह निर्णय लिया गया है। गौरतलब है कि महाराष्ट्र में कोविड के मामले लगातार बढ़ रहे हैं। 

पंजाब के सीेएम का आप पर तीखा हमला

पंजाब के सीएम चरणजीत सिंह चन्नी ने कहा है कि आम आदमी पार्टी कहती है कि मैं ड्रामा कर रहा हूं। अरविंद केजरीवाल ने कोर्ट में 'माफीनामा' दिया और बिक्रम सिंह मजीठिया से सॉरी बोला और भाग गए. वह एक फरार है। उनके 10 विधायकों ने भी उन्हें छोड़ दिया क्योंकि वह इस ड्रग मुद्दे पर स्टैंड नहीं ले सके।

बुधवार, 22 दिसंबर 2021

कोविड-19 की तीसरी लहर की दस्तक, किसी धोखे या भुलावे में न रहें, वायरस आपके बहुत करीब

वैक्सीन न लगवाने वालों के लिए हरियाणा में लॉकडाउन, इन जगहों पर नहीं मिलेगी एंट्री 
 हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि 1 जनवरी 22 से जिन लोगों ने दोनों खुराक नहीं ली हैं, उन्हें मैरिज हॉल, होटल, रेस्तरां, कार्यालय, बैंक या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने यह कदम आम जनता को ओमिक्रॉन और कोविड की तीसरी लहर से बचाने के लिए उठाए हैं। सामान्यतः कोविड के मामले में हम शेष दुनिया से कुछ हफ्ते पीछे चलते हैं। जैसे कोविड-19 जब आया तो दुनिया के तमाम देशों में दस्तक देता हुआ भारत में आया। हमें ये महामारी एक मजाक लगी। लेकिन इसका भयानक चेहरा जैस जैसे सामने आता गया लोग दहशत से भरते गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अचानक लॉक डाउन का एलान किया तो देश की बड़ी आबादी को यह नागवार गुजरा। वो पहली लहर थी फिर भी लोग बीमार पड़े काफी बड़ी संख्या में मौतें हुईं। जो लोग ठीक भी हो गए उनमें कोई न कोई निशानी बीमारी के रूप में कोविड छोड़ा गया। लेकिन जब दूसरी लहर आयी तो बहुत ही भयानक थी लाशों के ढेर लग गए। डाक्टरों आक्सीजन सिलंडरों वेंटिलेटरों की कमी पड़ गई। श्मशानों कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। लेकिन तीसरी लहर अभी बाकी थी। तब तक ओमिक्रान के रूप में वायरस का नया वैरिएंट सामने आया। दक्षिण अफ्रीका से चलकर यूरोपियन कंट्रीज होता हुआ ये वायरस अब भारत में प्रवेश करने के बाद फैलना शुरू कर चुका है। कोरोना को लेकर तमाम लोग अभी तक नहीं चेते हैं न तो उन्होंने वैक्सीन लगवाई है न वह कोरोना को गभीरता से ले रहे हैं। लेकिन अब ऐसे लोगों की मुसीबत बढ़ने वाली है। ये एक राष्ट्रीय संकट की घड़ी है जिन लोगों के वैक्सीन लग चुकी है या जिनके दोनों डोज लग चुके हैं उन्हें फिर भी खतरा कम है लेकिन जिन्होंने अभी तक एक भी डोज नहीं लगवाई है उन्हें खतरा ज्यादा है। और उनके चलते उन लोगों को खतरा है जो वैक्सीन लगवा चुके हैं। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए तमाम राज्यों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। इस क्रम में हरियाणा ने बड़ा कदम उठाया है। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि 1 जनवरी 22 से जिन लोगों ने दोनों खुराक नहीं ली हैं, उन्हें मैरिज हॉल, होटल, रेस्तरां, कार्यालय, बैंक या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने यह कदम खुद को ओमिक्रॉन और कोविड की तीसरी लहर से बचाने के लिए उठाए हैं।

बीएसएफ ने एक तस्कर और एक घुसपैठिया मार गिराया, सीमा पर हलचल तेज

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करों पर आंसू गैस के गोले दागे और 6 किलो चांदी के गहने बरामद किए। यह घटना पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) गोंगरा में हुई, जब बीएसएफ के जवानों ने 20 दिसंबर की सुबह 12 से 15 तस्करों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास आते देखा। तस्कर बीएसएफ की चेतावनी के बावजूद आगे बढ़ते रहे। जब वे नहीं माने तो सतर्क कर्मियों ने उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े।
फायरिंग के बीच तस्कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद जवानों ने 6 किलो वजन के चांदी के गहने बरामद किए। जब्त किए गए आभूषण को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए तेहट्टा में सीमा शुल्क विभाग को सौंप दिया गया है। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भारत-पाक सीमा पर गुरदासपुर सेक्टर में घुसपैठिए को उस समय मार गिराया जब वह मंगलवार सुबह 6.45 बजे भारतीय क्षेत्र से पार करने की कोशिश कर रहा था। बीएसएफ के अनुसार, घुसपैठिए, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, को उस समय मार गिराया गया जब वह भारतीय सीमा से बाड़ पर कूदने की कोशिश कर रहा था। पेट्रोलिंग टीम ने उन्हें चेतावनी दी लेकिन कई बार गुहार लगाने के बाद भी वह नहीं रुके। रिपब्लिकवर्ल्ड के मुताबिक, इससे पहले सोमवार को बीएसएफ ने एक पाकिस्तानी नागरिक को पकड़ा था। उसे पंजाब के डेरा बाबा नानक इलाके में पकड़ा गया था। सुरक्षा बलों ने एक फोन चार्जर के साथ पाकिस्तानी मुद्रा, मोबाइल फोन और ईयरफोन भी बरामद किया। घटना पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर के पास हुई। हाल ही में पंजाब पुलिस ने गुरदासपुर जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से एक टिफिन बम और चार हथगोले बरामद किए थे। रविवार की रात, बीएसएफ ने गुरदासपुर इलाके में एक पाकिस्तानी ड्रोन को देखा और पांच राउंड फायरिंग की, जिससे उसे पाकिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सिंगापुर में उड़ानों पर लगाई रोक, ये देश होंगे प्रभावित

सिंगापुर सरकार के निर्देश के बाद, सिंगापुर एयरलाइंस 23 दिसंबर 2021 से 20 जनवरी 2022 के बीच आज मध्यरात्रि से सिंगापुर में सभी वैक्सीनेटेड ट्रैवल लेन (VTL) उड़ानों के लिए नई बुकिंग स्वीकार करना बंद कर देगी। सरकार ने ओमिक्रॉन COVID-19 के नये वैरिएंट से जोखिम का हवाला देते हुए कहा है कि टीकाकरण यात्रा कार्यक्रम के तहत, सिंगापुर कुछ देशों से पूरी तरह से टीकाकरण वाले यात्रियों को क्वारंटाइन प्रवेश की अनुमति देता है, जिन्हें नियमित परीक्षण भी करना पड़ता है। अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक संदेश में, सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा है कि 22 दिसंबर 2021 को 2359 बजे (एसजीटी) से, सिंगापुर एयरलाइंस 23 दिसंबर 2021 के बीच निर्धारित सिंगापुर में सभी टीकाकरण यात्रा लेन (वीटीएल) उड़ानों के लिए नई बुकिंग स्वीकार करना बंद कर देगी। और 20 जनवरी 2022 (दोनों तिथियां सम्मिलित) तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी। एयरलाइन्स ने कहा है कि वह इस दौरान नई बुकिंग को निलंबित करने के सिंगापुर सरकार के निर्देश का पूरी तरह से पालन करती है।
एयरलाइन्स ने कहा है कि इस अवधि के दौरान वीटीएल उड़ान पर मौजूदा कन्फर्म बुकिंग वाले एसआईए ग्राहक, और टीकाकरण यात्रा पास (यदि लागू हो) के लिए सफलतापूर्वक आवेदन करने वाले ग्राहक इस निर्देश से प्रभावित नहीं हैं और वह अपनी यात्रा पर पूर्व निर्धारित योजनाओं के साथ आगे बढ़ सकते हैं। मौजूदा वीटीएल या परीक्षण आवश्यकताओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, और मौजूदा बुकिंग वाले यात्री सिंगापुर में क्वारंटाइन में प्रवेश कर सकते हैं यदि वे सभी वीटीएल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। इस निर्देश से उन यात्रियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो ग्राहक इस अवधि के दौरान वीटीएल उड़ानों पर सिंगापुर के माध्यम से पारगमन करना चाहते हैं, वे अपनी उड़ानें बुक करना जारी रख सकते हैं। टीकाकरण यात्रा लेन (वीटीएल) कार्यक्रम के तहत, सिंगापुर कुछ देशों से निर्धारित उड़ानों या बसों में पूरी तरह से टीका लगाए गए यात्रियों को क्वारंटाइन फ्री प्रवेश की अनुमति देता है। लेकिन ऐसे यात्रियों को नियमित परीक्षण से गुजरना पड़ता है। सिंगापुर ने ऑस्ट्रेलिया, भारत, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित लगभग दो दर्जन देशों के लिए इन लेन की स्थापना की है। सरकार ने कहा कि वह 20 जनवरी, 2022 के बाद यात्रा के लिए वीटीएल कोटा और टिकट बिक्री को अस्थायी रूप से कम कर देगी। उड़ानों के लिए, कुल टिकट बिक्री आवंटित कोटे के 50% पर होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हमारे सीमा निर्धारित करने संबंधी उपायों से हमें ओमिक्रॉन वैरिएंट का अध्ययन करने और समझने, और हमारी स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को बढ़ाने और अधिक लोगों का टीकाकरण करने और इस बढ़ावा देने सहित हमारी प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

शनिवार, 2 अक्टूबर 2021

पितृदोष या शापित कुंडली देता है भयानक दुष्परिणाम, मजबूर हो गया मानने को

दोस्तों पिछले दिनों पितृपक्ष में मै गया चला गया। अपने पितरों का श्राद्ध व पिंडदान करने। मेरे परिवार में पिछली सात पीढ़ियों में किसी की गया नहीं हुई जैसा कि मेरी जानकारी है। मेरे पूर्वज गया तीर्थ को मानते थे या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन ये कहते सुना जरूर था कि हम नहीं मानते कि लड़के पानी नहीं देंगे तो हम तरेंगे नहीं। लेकिन मेरे परिवार में एक बात बहुत कामन रही कि उम्र की अधेड़ावस्था में आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है जोकि इतना भयानक होता है कि पूरा परिवार असतव्यस्त हो जाता है। जहां से मुझे जानकारी है मेरे परबाबा के पिता जी कन्हैया लाल वाजपेयी रानी झांसी के साथ लड़े थे। उनके पुरखे रीवां के किसी गांव से थे जो कि मुझे जानकारी नहीं है लेकिन मेरे बाबा कहा करते थे कि हमारे पुरखे रीवां नरेश के राजगुरु थे। सत्य क्या है नहीं पता। खैर रानी झांसी की पराजय और उनके न रहने पर अंग्रेजों का दमन चक्र चला परिवार को बचाने के लिए वह एक बैलगाड़ी में पुआल के नीचे परिवार को छिपा कर किसी तरह कानपुर में बिठूर के पास रामनगर गांव पहुंचे और यहां परिवार को छोड़कर आजादी की जंग लड़ने चले गए और फिर नहीं लौटे। उनके लड़के सतीदीन वाजपेयी रामनगर जिसे राजस्व गांव बगदौदी बांगर भी कहते हैं वहां सत्ती सूरमा के नाम से मशहूर हुए। सुना है उनके साथ घुड़सवारे दस्ता चलता था और बड़े बड़े जमींदार दंडवत हो जाते थे। 1900 ईसवी के आसपास जब प्लेग फैला तो उसमें उनकी, उनकी पत्नी और बेटी की मौत हो गई थी। जिस तरह आज के दौर में कोरोना मरीज की मौत होने पर उसका शरीर कोई नहीं छूता था उसी तरह से प्लेग थी। कई दिन तक लाशें गांव में पड़ी रहीं फिर कोई कहीं डाल आया। उनके तीन पुत्र थे शंभू, गोविंद और गोपाल। शंभू रूरा के पास गाऊपुर गांव में थे। संभव है प्लेग के डर से गांव न आए हों। लेकिन उनके न आने से बाबा को ऐसी नाराजगी हुई कि उनसे कोई संबंध नहीं रखा। बाद में मेरे बाबा किसी तरह से जब पढ़ लिख गए तो गांव लौटे लेकिन तब तक उनके छोटे भाई गोपाल की भी मृत्यु हो चुकी थी। दादी बाबा अम्मा पिताजी इनकी विधिवत अंत्येष्टि हुई थी। लेकिन मुझसे कई तांत्रिकों और ज्योतिषियों ने कहा आप पर पितृदोष है। आपके साथ आपके पितृ चल रहे हैं। वह अपनी मुक्ति चाहते हैं। अधेड़ावस्था मेंआजीविका का संकट बाबा को भी आया। पिताजी को भी आया। मेरे भैया को भी आया और मुझे भी भोगना पड़ रहा है। इसलिए लोगों के बार बार कहने पर पितृदोष से मुक्ति और पितरों की आत्मा को शांति देने की कामना से मै गया हो आया। सब पितरों को बैठा आया। मन वचन कर्म से यही प्रार्थना है वह मुक्ति पाएं। हमने जो भोगा हमारे बच्चों को इस पितृदोष से मुक्ति मिले। इस बार इतना ही बाकी फिर कभी।

सोमवार, 20 सितंबर 2021

राजकुंद्रा बदनाम हुए तो क्या, नाम तो हो ही गया धंधा भी चमक गया

राज कुंद्रा को जमानत मिल गई है। शिल्पा शेट्टी आज दीपावली मनाएंगी क्योंकि उनके कामशास्त्र के सरताज दूसरे कोका पंडित आज जेल से कामसूत्र के आसनों पर नई कलात्मक दृष्टि लेकर बाहर आए हैं। कामसूत्र का दर्शन देने वाली इस भारत भूमि की धरा पर बहुत नाइंसाफी है कि काम शास्त्र के आसनों पर गहन शोध करने वाले प्रोफेसर को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया। उनके कामसूत्र दर्शन की तमाम नायिकाएं विरहणी हो गई थीं। सोशल मीडिया पर आंसुओं में डूबे उनके उद्गार रह रहकर बाहर आ रहे थे। खुद पत्नी सहधर्मिणी के रूप में शिल्पा शेट्टी को भी पति की इस दृष्टि पर जब कोई एतराज नहीं तो हम कौन होते हैं आपत्ति जताने वाले। बेहतर तो ये होता कि शिल्पा शेट्टी को स्वयं उनके कल्पना संसार की नायिका बनना चाहिए था। लेकिन क्या कहा जाए शायद वह इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाईं। राजकुंद्रा पर पोर्नग्राफी को पिक्चराइज कर महिमामंडित किये जाने का आरोप है। तमाम जरूरतमंद रुपहले संसार की शोभा बनने की इच्छुक नायिकाओं को राजकुंद्रा की इस नयी दृष्टि ने एक नया मंच दिया। लेन देन की इस दुनिया में मुफ्त में कुछ नहीं मिलता। इस प्लेटफार्म पर अपनी सेवा देने और सेवा लेने वाला दोनों संतुष्ट हैं। कोई जबर्दस्ती नहीं। कोई व्यभिचार नहीं। देखने वाला पैसा खर्च कर इसका आनंद ले रहा था। और राजकुंद्रा पैसा बना रहे थे। खैर जो भी हो नाम तो हो ही गया। शौकीन लोग ढंढ ढूंढ कर देख रहे हैं।

Votes to select a patriot: शहर चलाने के लिए एक अदद देशभक्त की तलाश, इस देश हो रहा अनोखा चुनाव

रामकृष्ण वाजपेयी सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा होगा लेकिन आपके पड़ोसी मुल्क चीन के एक शहर हांगकांग में ऐसा होने जा रहा है। हांगकांग की व्यवस्था को चलाने के लिए ऐसा होने जा रहा है। यहां के निवासियों ने रविवार को चुनाव समिति के सदस्यों को चुनने के लिए मतदान किया है और समिति के ये चुने गए सदस्य शहर के देशभक्त नेता का चुनाव करेंगे। हांगकांग के निवासियों के मतदान के बाद चुनी गई ये समिति दिसंबर में होने वाले चुनाव के दौरान शहर की विधायिका के लिए 90 में से 40 सांसदों का चयन करेगी, साथ ही अगले साल मार्च में होने वाले चुनाव के दौरान हांगकांग के नेता का चुनाव करेगी। चीन के प्रति निष्ठावान लोगों की उम्मीदवारी सुनिश्चित करने वाला अपनी तरह का यह पहला चुनाव है। इस चुनाव को बदले हुए कानूनों के तहत कराया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले मई माह में विधायिका ने यह सुनिश्चित करने के लिए हांगकांग के चुनावी कानूनों में संशोधन किया था कि केवल "देशभक्त" लोग जो चीन के प्रति वफादार हैं वही हांगकांग शहर पर शासन करेंगे। इसके लिए चुनाव समिति को भी 1200 से बढ़ाकर 1500 सदस्यों तक कर दिया गया है। इसके अलावा समिति की सीटों के लिए प्रत्यक्ष मतदाताओं की संख्या दो लाख 46 हजार से घटाकर आठ हजार तक कम कर दी गई है। बताया जाता है कि यह परिवर्तन 2019 में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन के बाद हांगकांग के नागरिक समाज पर की जाने वाली एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। अधिकारियों ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा लगाए गए एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के साथ शहर पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिसने सरकार के विरोध को प्रभावी ढंग से अपराध बना दिया है। यानी अब हांगकांग में विरोध का स्वर उठाने वाले के साथ अपराधी की तरह बर्ताव किया जाएगा। हांगकांग के कानूनों में हुए इन व्यापक परिवर्तनों ने कई नागरिक संगठनों को भंग करने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे तमाम संगठनों के नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया है। हालांकि इतने सख्त प्रावधानों का विरोध भी हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि नये परिवर्तन स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करते हैं, हांगकांग से वादा किया गया था कि वह 1997 में औपनिवेशिक ब्रिटेन से चीन को क्षेत्र के हैंडओवर के बाद 50 वर्षों तक बनाए रख सकता है। यूनियनों की कोई ज़रूरत नहीं है? नये कानूनों के मुताबिक अब य़ूनियनों की कोई जरूरत नहीं रह गई है। हांगकांग के सबसे बड़े विपक्षी ट्रेड यूनियन ने रविवार को कहा कि वह अपने सदस्यों की सुरक्षा के लिए चिंताओं से मुक्त हो गए हैं।

Mahesh Bhatt: बेटी से शादी की इच्छा रखने वाला शख्स, विवादों से रहा गहरा नाता

रामकृष्ण वाजपेयी फिल्म निर्माता लेखक महेश भट्ट बॉलीवुड का एक ऐसा नाम है जो 73 साल की उम्र में भी अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। इनका सबसे सनसनीखेज बयान था अपनी बेटी से शादी की इच्छा का इजहार करना। परवीन बॉबी को सेक्स एडिक्ट बताने वाला बयान। इसके अलावा भी उनके तमाम बयान ऐसे हैं जो उन्हें विवादों में लाते रहे हैं। वर्तमान में वह ट्वीटर से लगभग दो साल से किनारा कसे हुए हैं। पिछले दिनों वह सरबत दा भला चेरिटेबल ट्रस्ट के संचालक मशहूर व्यवसायी डॉ. एसपी ओबराय जिनका पूरा नाम सुरेंदरपाल सिंह ओबराय है के जीवन पर फिल्म लाने की बात कहकर चर्चा में आए थे। डॉ. ओबराय के नाम से अपरिचित लोगों को हम बता दें कि ये वही ओबराय हैं जो विदेशी जेलों में फंसे हिन्दुस्तानियों की घर वापसी करवाने के बाद अफगानिस्तान के रिफ्यूजियों के लिए फरिश्ता बने थे। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही ओटीटी प्लेटफार्म और बड़े पर्दे पर ओबराय पर फिल्मायी गई फिल्म देखने को मिलेगी। जिस पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। कौन हैं महेश भट्ट महेश भट्ट गुजराती हिन्दू पिता नानाभाई भट्ट और मुस्लिम मां शिरिन मोहम्मद अली की संतान हैं। उनकी आरंभिक पढ़ाई डान बास्को स्कूल माटुंगा में हुई। बताया जाता है कि अपनी स्कूली शिक्षा के दिनों में ही उन्होंने गर्मी की छुट्टियों में ही उत्पादों के विज्ञापन के जरिये कमाई शुरू कर दी थी। महेश भट्ट के संघर्ष का दौर इसके बाद एक समय महेश भट्ट के संघर्ष का दौर रहा जब इन्होंने स्मिता पाटिल और विनोद खन्न के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया पहला प्यार और तलाक जानने वालों का कहना है कि महेश भट्ट की स्टूडेंट लाइफ में ही उन्हें लोरिएन ब्राइट नाम की लड़की से प्यार हो गया। जिसने बाद में अपना नाम बदलकर किरन भट्ट कर लिया। यही किरन भट्ट पूजा भट्ट की मां हैं। लेकिन एक समय ऐसा आया जब यह रिश्ता टूटना शुरू हुआ ये समय था महेश भट्ट की जिंदगी में परवीन बॉबी की एंट्री का। लेकिन परवीन बॉबी के साथ महेश भट्ट के रिश्ते टिकाऊ नहीं रहे और जल्द ही वह उकता गए इसके बाद उनकी जिंदगी में सोनी राजदान की एंट्री हुई। इस समय तक उनका किरन से तलाक नहीं हुआ था इसलिए इस शादी के लिए वह मुस्लिम बन गए। इस शादी से उन्हें दो बेटियां हुईं शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट। आलिया भट्ट नामी एक्ट्रेस हैं। फिल्मों में कौन लाया महेश भट्ट को इस बुजुर्ग डायरेक्टर को फिल्मी दुनिया में प्रवेश देने का श्रेय राजखोसला को जाता है। जिनके साथ इन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया। कहा जाता है कि फिल्म कब्जा से उन्होंने निर्देशक के रूप में काम करना शुरू किया। लेकिन बहुत दिन तक महेश भट्ट जैसे क्रिएटिव आदमी का यह साथ नहीं चला चूंकि उनकी सोच लीक से हटकर फिल्में बनाने की थी। महेश भट्ट के सुनहरे दौर की शुरुआत 26 साल की उम्र में 1974 में मंजिलें और भी हैं फिल्म से महेश भट्ट ने निर्देशन की शुरूआत की। 1979 में उनकी लहू के दो रंग फिल्म आई जिसमें शबाना आजमी और विनोद खन्ना ने अभिनय किया। इस फिल्म को दो फिल्म फेयर अवार्ड मिले। लेकिन 1982 में आई फिल्म अर्थ से इन्हें सबसे ज्यादा आलोचना और प्रसिद्धि मिली। 1984 मे फिल्म सारांश ने इन्हें स्थापित कर दिया। इसके बाद 1985 में फिल्म जन्म आई। इसके बाद इनकी बड़ी फिल्म थी 1990 में आशिकी। जो कि व्यावसायिक स्तर पर सफल फिल्म रही। इसके बाद 1991 में महेश भट्ट ने बेटी पूजा भट्ट को दिल है कि मानता नहीं फिल्म से लांच किया जिसे अभूतपूर्व सफलता मिली। एक निर्देशक के रूप में महेश भट्ट की 1999 में आई फिल्म कारतूस थी। इससे पहले 1993 में फिल्म सर, 1996 में दस्तक, 1998 में डुप्लीकेट और जख्म। महेश दार्शनिक यूजी कृष्णमूर्ति को अपनी लाइफलाइन मानते हैं और उन्होंने उनकी बायोग्राफी भी लिखी है। कई किताबों का उन्होंने संपादन भी किया है। कृष्णमूर्ति पर उनकी आखिरी किताब 2009 में प्रकाशित हुई थी।

रविवार, 19 सितंबर 2021

Punjab ke nae sardar: अमरिंदर और सिद्धू की लड़ाई में चन्नी ने मारी बाजी

रामकृष्ण वाजपेयी पंजाब में नेतृत्व की लड़ाई में कैप्टन अमरिंदर सिंह और नवजोत सिद्धू के बीच शुरू हुई इस लड़ाई का पटाक्षेप होते होते दिग्गजों को पछाड़ कर चरनजीत सिंह चन्नी ने बाजी जीत ली। अब पहली बार पंजाब एक दलित मुख्यमंत्री बनने जा रहा है। कांग्रेस हाईकमान ने यह फैसला पंजाब में दलितों की भारी जनसंख्या और 117 सीटों पर आरक्षण को देखते हुए लिया है। इस फैसले से सुनील जाखड़ फिर अम्बिका सोनी का इनकार, रंधावा का नाम उभरना। इन सबको झटका लगा है। पंजाब में नेतृत्व परिवर्तन के साथ ही फिलहाल अमरिंदर और सिद्धू विवाद का पटाक्षेप होता दिख रहा है। शनिवार को पंजाब कांग्रेस विधायक दल की बैठक में धुरंधर कांग्रेसी रहे बलराम जाखड़ के पुत्र सुनील जाखड़ के नाम का एलान हो गया होता अगर सुखजिंदर सिंह रंधावा ने सिख और गैर सिख का पेंच न फंसाया होता। उधर कैप्टन के इस्तीफे के झटके से अभी हाईकमान संभल भी नहीं पाया था कि वरिष्ठ नेता शशि थरूर ने पार्टी में तुरंत नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठाते हुए सोनिया गांधी के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। पंजाब भाजपा की ओर से कांग्रेस से नाराज कैप्टन को अपने पाले में लाने की कसरत शुरू हो गयी है लेकिन असली पेंच कैप्टन की तीन कृषि कानून वापस लेने की मांग पर अड़ जाने से फंस गया। अगर कैप्टन राजी हो जाते तो कांग्रेस दोफाड़ कराकर गेम चेंजर हो सकते थे। चन्नी का बहुत लंबा चौड़ा परिचय नहीं है वह नेता विपक्ष रह चुके हैं। और अमरिंदर सरकार में मंत्री थे। सुखजिंदर सिंह रंधावा अमरिंदर मंत्रिमंडल में जेल और सहकारिता के राज्य मंत्री रहे हैं। वह डेरा बाबा नानक का प्रतिनिधित्व करते हैं। रंधावा पिछले दिनों सुरक्षा मांगे जाने को लेकर भी चर्चा में आए थे जब केंद्र सरकार ने कहा था कि रंधावा को कोई खतरा नहीं है इसलिए सुरक्षा नहीं मिलेगी। इसके अलावा रंधावा की जाति के आधार पर आरक्षण की मांग का पंजाब बसपा अध्यक्ष जसवीर सिंह घड़ी ने विरोध करते हुए कहा था कि रंधावा की जाति के आधार पर आरक्षण की मांग अशोभनीय है। उन्होंने कैप्टन अमरिंदर को हटाने की पार्टी हाईकमान से मांग भी की थी। इसमें त्रिपत राजिंदर सिंह बाजवा ने उनका साथ दिया था। इसके बाद दोनों ने बटाला को नया जिला बनाने की भी मांग की थी। बडबोलेपन में तो नहीं फंसे जाखड़ उधर सुनील जाखड़ भी अपने बड़बोलेपन से फंस गए लग रहे हैं। दरअसल मुख्यमंत्री बनाए जाने की बात से वह इतने खुश हो गए कि अपने ट्वीटर अकाउंट पर सुनील जाखड़ ने राहुल गांधी की तारीफों के पुल बांध दिये। जाखड़ ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर लिखा कि राहुल गांधी ने चल रहे झगड़े का बेहद सटीक हल निकाला है। इससे कांग्रेस कार्यकर्ताओं में जोश भरा ही है, साथ ही शिरोमणि अकाली दल की रीढ़ भी टूट गई है। जाखड़ के इस ट्वीट का भी नकारात्मक असर हुआ है।

शुक्रवार, 17 सितंबर 2021

स्पर्श चिकित्साः हर माता पिता हैं अपने बच्चों के डाक्टर

ये किसी गंभीर बीमारी की बात नहीं है। किसी गंभीर स्थिति में तो डॉक्टर के पास जाना ही उचित है लेकिन अक्सर होता ये है कि बच्चे की थोड़ी बहुत तबियत खराब होने पर भी माता पिता घबड़ा जाते हैं। अपने बच्चों से अत्यधिक मोह के चलते उन्हें हमेशा एक अंजाना भय सताता रहता है। इसके लिए कई बार वह नजर झड़वाने के लिए तो कभी स्वाभाविक स्वभाव को लेकर कि बच्चा जैसे जैसे बड़ा हो रहा जिद्दी होता जा रहा है। शरारती हो रहा है। कुछ दे दीजिए कुछ कर दीजिए। इस तरह की बातें अक्सर होती रहती हैं। वस्तुतः हम अपनी सकारात्मक ऊर्जा से अंजान रहते हैं। या उसके इस्तेमाल करने का तरीका नही जानते है। होता ये है कि मोह और प्रेम में अंधे होकर हम ये भूल जाते हैं कि उन्हें जन्म हमने दिया है। उनके भगवान हम हैं। फिर हम उनके लिए दूसरों के आगे क्यों गिड़गिड़ाएं। इसके कई कारण हैं पहला ये कि बच्चा माता पिता का अंश होता है। बच्चे के चोट लगती है तो मां का स्पर्श उसे इतना स्फूर्त कर देता है कि वह कुछ क्षण में फिर से खेलना शुरू कर देता है। इसके अलावा किसी खतरे के आसन्न होने पर पिता की गोद उसे सबसे सुरक्षित लगती है। और होती भी है। ये सहज घटनाएं याद रखनी चाहिए। आपका आत्मबल इतना होना चाहिए कि आपके बच्चे को कुछ नहीं हो सकता। एक उदाहरण दे रहा हूं बुरा नहीं मानना चाहिए आप एक कुत्ते के पिल्ले को पालतू बनाकर जितना स्नेह देते हैं क्या आप अपने बच्चे को उतना स्नेह दे पाते हैं। शायद नहीं। इसकी वजह है कुत्ते के पिल्ले को आप जानवर मानकर चलते हैं। और अपने बच्चे की दूसरे के बच्चे से तुलना शुरू कर देते हैं। एक मासूम बच्चे का अपराध इतना है कि वह इंसान का बच्चा है। इसलिए उससे अपेक्षाएं जुड़ती हैं। फलाने का बच्चा ऐसा है। वो बच्चा पढ़ने में तेज है। हम बच्चे थे तो ऐसे नहीं थे। आप अपने बच्चे को अपनी कुंठाओं के पौधे के रूप मे तैयार न करें। उसको परवरिश अपने स्नेह की छाया में करें। उसका पोषण करें। निसंदेह वह मजबूत और स्वस्थ मानसिकता का होगा।

बुधवार, 15 सितंबर 2021

घर पर साधना आराधना कैसे करें, मुंहमांगी मुराद हो जाए पूरी

हर घर में भगवान की पूजा होती है। सभी अपने अपने ढंग से भगवान ईश्वर अल्लाह गॉड को पूजते हैं। नास्तिक होना भी साधना का ही एक रूप है जिसे अनीश्वरवाद कहा गया है। कुल मिलाकर कोई ईश्वरीय सत्ता इसलिए मानी जाती है जिससे हम सब संचालित होते हैं। कुछ लोग इसे कैमिकल्स का रिएक्शन कहते हैं। वस्तुतः फिर भी कुछ ऐसे रहस्य हैं जिन्हें साइंस भी नहीं सुलझा पाती। अगर देखा जाए तो एक बात साफ है साधना एक प्रकार का मेेडिटेशन है जिसमें हम कुछ देर के लिए ही सही अपने दिमाग को एकाग्र करते हैं जिसका नतीजा ये होता है कि हमें हमारी समस्या का हल मिल जाता है। अब आस्थावान लोग इसे भगवान का चमत्कार कहते हैं। इस लिए अगर आप अपनी जटिल समस्या का समाधान खुद करना चाहते हैं तो आप जिस भगवान को मानते हैं निराकार भगवान को मानते हैं तो भी यदि आप नियम से संकल्प लेकर नियत समय पर अपनी इच्छा को भगवान के सामने रखकर उसका हल पाने की प्रत्याशा में साधना शुरू करते हैं तो निश्चय ही आपको उसका हल मिल जाएगा। यह अनुभूत प्रयोग है। किसी पंडित या साधक से करवाने पर इसकी सफलता की संभावना इसलिए कम रहती है क्योंकि वह आपके लिए कितनी एकाग्रता से साधना कर रहा है। यदि वह आपसे जुड़कर आपके लिए साधना करेगा तो सफलता तय है वरना नहीं। आप नियम से किसी मंत्र किसी चौपाई किसी भगवान का नाम जपना शुरू करें। 11 दिन, 21 दिन 41 दिन या 108 दिन यदि आपका काम बीच में हो जाए तो भी इसे छोड़ें नहीं ईश्वर को धन्यवाद दें। ध्यान रखें बच्चा जबतक रोता नहीं मां भी दूध नहीं पिलाती। आपको वह बाल स्वरूप जगत के माता पिता को दिखाना होगा।

मंगलवार, 14 सितंबर 2021

ये अपशकुन तो नहींः घर में भगवान की मूर्ति खंडित होना, तस्वीर टूटना, प्रसाद गिरना

हर घर में पूजा होती है। भगवान की अलमारी भी होती है। हर व्यक्ति की भावनाएं भगवान से जुड़ी होती हैं। ऐसे में मंदिर की सफाई करते समय या हाथ लगने से अचानक भगवान की मूर्ति गिर कर टूट जाए या रखते समय लुढ़कर टूट जाए तो सबके मन में एक झटका सा लगता है। अरे कहीं अपशकुन तो नहीं हो गया। यही बात घर में लगी तस्वीर के अचानक गिरकर टूट जाने पर भी होती है। घर का हर शख्स सहम जाता है। कभी आप पंडित जी से प्रसाद ले रहे होते हैं और प्रसाद गिर जाता है। या हवन में पूर्णाहुति के समय नारियल छिटक जाता है। ऐसी तमाम घटनाएं हैं तो आस्थावान लोगों के मन को विचलित कर देती हैं। चलिए आज हम आपको बताते हैं कि ऐसा कुछ नहीं होता। भगवान आपकी श्रद्धा और आस्था के भूखे हैं। आप उन्हें प्रेम से जो भोग लगाएंगे वह खा लेंगे। लेकिन किसी भी अच्छे कार्य को करते समय नकारात्मक विचार लाना गलत है। मन चंगा तो कठौती में गंगा। भगवान की मूर्ति अगर रखे रखे भी टूट गई है तो ये देखने की जरूरत है कि वह मूर्ति चटकी तो नहीं है। अगर पहले से चटकी मूर्ति टूट गई तो कुछ अपशकुन नहीं है। भगवान की मूर्ति हाथ लगने से लुढ़क गई तो कुछ अपशकुन नहीं है। पंखा चलाने से मंदिर का दिया बुझ गया तो कुछ अपशकुन नहीं है। दिये को जोत को ठीक करते समय इसी लिए कहा जाता है कि समानांतर दूसरा दिया जला देना चाहिए। ताकि अगर बुझ जाए तो मन में खराब विचार न आए। असली चीज है भावना आपके मन में पाप नहीं है तो किसी हादसे के लिए पाप बोध भी नहीं लाना चाहिए। प्रसाद लेते समय गिर गया तो भी असावधानी है। पूर्णाहुति के समय सामग्री छिटककर बाहर गिरी तो भी कुछ गलत नहीं लेकिन बाहर गिरी सामग्री का पुनः इस्तेमाल नहीं करना चाहिए। इसी तरह कोई तस्वीर टूट जाए तो इसमें भी परेशान होने की जरूरत नहीं है। भगवान के प्रति आप अपना समर्पण बकरार रखें। मृत्यु और जीवन की डोर ईश्वर के हाथ है फिर आप किस बात से डर रहे हैं। भय को त्यागें ईश्वर में मन लगाएं जो होगा अच्छा ही होगा।

गुरुवार, 11 मार्च 2021

सृष्टि के आरंभ का उत्सव है महाशिवरात्रि पर्व

विश्व में अंधकार और अज्ञानता को दूर करने का महापर्व है शिवरात्रि

 


रामकृष्ण वाजपेयी

विनाश और सृजन के देवता भगवान शिव उपासना का महापर्व है शिवरात्रि। महाशिवरात्रि का पर्व शुक्ल पक्ष में त्रयोदशी और चतुर्दशी तिथियों के बीच मनाया जाता है। इस बार यह पर्व 11 मार्च को पड़ रहा है। ये एक ऐसा पर्व है जिसमें दिन से लेकर पूरी रात शिव को समर्पित होती है।

महाशिवरात्रि का अर्थ है शिव की महान रात्रि। शिवरात्रि के आने की आहट मात्र से वसंत अंगड़ाई लेने लग जाता है। प्रकृति अपने सुंदरतम रंगों के पुष्प-परिधान एवं गहने धारण कर सज जाती है। खेतों में जौ, गेहू, मटर, चना, सरसों आदि दलहन तिलहन फसलें गदरा जाती हैं। आम के पेड़ मंजरी से समृद्ध होकर फलो के सिरमौर बन जाते हैं। विश्व का हर प्राणी वासंतिक बयार में मदमस्त होने लगता है तब आती है वासंतिक शिवरात्रि। भारत के कई राज्यों और नेपाल तथा मारीशस जैसे देशों में महाशिवरात्रि के पर्व पर सार्वजनिक अवकाश रहता है।

पौराणिक कथाओं के अनुसार इस दिन सृष्टि का आरम्भ अग्निलिंग (जो महादेव का विशालकाय स्वरूप है) के उदय से हुआ। इसीलिए शिवरात्रि आदिकाल से मनायी जाती रही है। कहते हैं महाशिवरात्रि वह रात है जब भगवान शिव ने इस प्राणिलोक के सृजन, संरक्षण और संहार के लिए तांडव नृत्य किया था। यह भी कहा जाता है कि इस दिन भगवान शिव ने विश्व को बचाने के लिए समुद्र मंथन से निकले हालाहल का पान किया था। उन्होंने यह कार्य विश्व को नकारात्मक प्रभाव से बचाने के लिए किया था।

महाशिवरात्रि को विश्व में जीवन से अंधकार और अज्ञानता दूर करने का महापर्व भी माना जाता है। अधिकांश त्योहार दिन में मनाए जाते हैं जबकि महाशिवरात्रि का पर्व रात में मनाया जाता है। कहते हैं शिवरात्रि उस दिन भी थी जब शिव पार्वती का विवाह हुआ।

कहा यह भी जाता है कि महाशिवरात्रि के दिन ही शिवलिंग का प्राकट्य हुआ था जब ब्रह्मा और विष्णु में श्रेष्ठ कौन, यह बहस छिड़ गयी थी। उसी समय एक भविष्यवाणी हुई थी कि तुममे से जो मेरे आदि और अंत का पता लगा लेगा वह श्रेष्ठ। ब्रह्मा जी आदि का पता लगाने गए और विष्णु अंत का। विष्णु जब अंत न पा सके तो लौट आए और अपनी असफलता स्वीकार कर ली। उधर ब्रह्माजी भी आदि न पा सके लेकिन उन्हें ऊपर से एक फूल आता दिखायी दिया वह फूल केतकी का था। ब्रह्माजी ने उसे झूठी गवाही देने को राजी कर लिया। और शिव से आकर कहा वह आदि पा गए हैं और गवाही में यह केतकी का फूल है।यह सुनकर शिव जी क्रोधित हो गए और केतकी के फूल को झूठ बोलने के कारण श्राप दिया कि तुमने मुझपर अर्पित होने का अधिकार खो दिया है। तब से भगवान शिव की पूजा करते वक्त केतकी के फूल नहीं अर्पित करने चाहिए। विष्णु को श्रेष्ठ भगवान माना गया।

बेल पत्र चढ़ाने से भगवान शिव प्रसन्न होते हैं। तीनों लोकों में जितने पुण्य-तीर्थ स्थल हैं, वे सभी तीर्थ स्थल बेल पत्र के मूलभाग में स्थित माने जाते हैं। जो लोग अपने घरों में बेल का वृक्ष लगाते हैं, उन पर शिव की कृपा बरसती है। घर के उत्तर-पश्चिम दिशा में बेल का वृक्ष लगाने से यश और कीर्ति की प्राप्त‍ि होती है। घर के उत्तर-दक्षिण दिशा में बेल का वृक्ष लगाने से घर में सुख-शांति रहती है। यदि बेल का वृक्ष घर के बीच में लगा हो तो घर में धन-धान्य की कोई कमी नहीं रहती है और परिजन खुशहाल रहते हैं। जो व्यक्ति बेल के वृक्ष के मूल भाग की गन्ध, पुष्प आदि से पूजा अर्चना करता है, उसे मृत्यु के पश्चात शिव लोक की प्राप्ति होती है।

एक और जानने योग्य बात चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या तिथियों को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। पूजा से एक दिन पूर्व ही बेल पत्र तोड़कर रख लेना चाहिए। सिर्फ इस एक पेड़ की करें पूजा, भगवान शिव, गणपति और शनिदेव तीनों होंगे प्रसन्न। बेल पत्र कभी अशुद्ध नहीं होता है। यदि आपको पूजा के लिए नया बेल पत्र नहीं मिल रहा है तो आप किसी दूसरे के चढ़ाए गए बेल पत्र को स्वच्छ जल से धोकर भगवान शिव को अर्पित कर सकते हैं। बेल पत्र में 3 पत्त‍ियां होनी चाहिए। कटी-फटी पत्तियों का बेल पत्र भगवान शिव को अर्पित नहीं करना चाहिए।

 


शनिवार, 27 फ़रवरी 2021

मानसिक रोग और ज्योतिष का क्या है संबंध

मानसिक रोग और ज्योतिष

मानसिक बीमारी होने के बहुत से कारण होते हैं, इन कारणों का ज्योतिषीय आधार क्या है, इसकी जानकारी के लिये कुंडली के उन योगों का अध्ययन करेंगे जिनके आधार पर मानसिक बीमारियों का पता चलता है.
मानसिक बीमारी में चंद्रमा, बुध, चतुर्थ भाव व पंचम भाव का आंकलन किया जाता है. चंद्रमा मन है, बुध से बुद्धि देखी जाती है और चतुर्थ भाव भी मन है तथा पंचम भाव से बुद्धि देखी जाती है. जब व्यक्ति भावुकता में बहकर मानसिक संतुलन खोता है तब उसमें पंचम भाव व चंद्रमा की भूमिका अहम मानी जाती है.

सीजोफ्रेनिया बीमारी में चतुर्थ भाव की भूमिका मुख्य मानी जाती है. शनि व चंद्रमा की युति भी मानसिक शांति के लिए शुभ नहीं मानी जाती है. मानसिक परेशानी में चंद्रमा पीड़ित होना चाहिए.

जन्म कुंडली में चंद्रमा अगर राहु के साथ है तब व्यक्ति को मानसिक बीमारी होने की संभावना बनती है क्योकि राहु मन को भ्रमित रखता है और चंद्रमा मन है. मन के घोड़े बहुत ज्यादा दौड़ते हैं. व्यक्ति बहुत ज्यादा हवाई किले बनाता है.

यदि जन्म कुंडली में बुध, केतु और चतुर्थ भाव का संबंध बन रहा है और यह तीनों अत्यधिक पीड़ित हैं तब व्यक्ति में अत्यधिक जिदपन हो सकती है और वह सेजोफ्रेनिया का शिकार हो सकता है. इसके लिए बहुत से लोगों ने बुध व चतुर्थ भाव पर अधिक जोर दिया है.

जन्म कुंडली में गुरु लग्न में स्थित हो और मंगल सप्तम भाव में स्थित हो या मंगल लग्न में और सप्तम में गुरु स्थित हो तब मानसिक आघात लगने की संभावना बनती है.

जन्म कुंडली में शनि लग्न में और मंगल पंचम भाव या सप्तम भाव या नवम भाव में स्थित हो तब मानसिक रोग होने की संभावना बनती है.

कृष्ण पक्ष का बलहीन चंद्रमा हो और वह शनि के साथ 12वें भाव में स्थित हो तब मानसिक रोग की संभावना बनती है. शनि व चंद्र की युति में व्यक्ति मानसिक तनाव ज्यादा रखता है.

जन्म कुंडली में शनि लग्न में स्थित हो, सूर्य 12वें भाव में हो, मंगल व चंद्रमा त्रिकोण भाव में स्थित हो तब मानसिक रोग होने की संभावना बनती है.

राहु व चंद्रमा लग्न में स्थित हो और अशुभ ग्रह त्रिकोण में स्थित हों तब भी मानसिक रोग की संभावना बनती है.

मंगल चतुर्थ भाव में शनि से दृष्ट हो या शनि चतुर्थ भाव में राहु/केतु अक्ष पर स्थित हो तब भी मानसिक रोग होने की संभावना बनती है.

जन्म कुंडली में शनि व मंगल की युति छठे भाव या आठवें भाव में हो रही हो.

जन्म कुंडली में बुध पाप ग्रह के साथ तीसरे भाव में हो या छठे भाव में हो या आठवें भाव में हो या बारहवें भाव में स्थित हो तब भी मानसिक रोग होने की संभावना बनती है.

यदि चंद्रमा की युति केतु व शनि के साथ हो रही हो तब यह अत्यधिक अशुभ माना गया है और अगर यह अंशात्मक रुप से नजदीक हैं तब मानसिक रोग होने की संभावना अधिक बनती है.

जन्म कुंडली में शनि और मंगल दोनो ही चंद्रमा या बुध केन्द्र में स्थित हों तब मानसिक रोग होने की संभावना बनती है.