बुधवार, 22 दिसंबर 2021

कोविड-19 की तीसरी लहर की दस्तक, किसी धोखे या भुलावे में न रहें, वायरस आपके बहुत करीब

वैक्सीन न लगवाने वालों के लिए हरियाणा में लॉकडाउन, इन जगहों पर नहीं मिलेगी एंट्री 
 हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि 1 जनवरी 22 से जिन लोगों ने दोनों खुराक नहीं ली हैं, उन्हें मैरिज हॉल, होटल, रेस्तरां, कार्यालय, बैंक या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने यह कदम आम जनता को ओमिक्रॉन और कोविड की तीसरी लहर से बचाने के लिए उठाए हैं। सामान्यतः कोविड के मामले में हम शेष दुनिया से कुछ हफ्ते पीछे चलते हैं। जैसे कोविड-19 जब आया तो दुनिया के तमाम देशों में दस्तक देता हुआ भारत में आया। हमें ये महामारी एक मजाक लगी। लेकिन इसका भयानक चेहरा जैस जैसे सामने आता गया लोग दहशत से भरते गए। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जब अचानक लॉक डाउन का एलान किया तो देश की बड़ी आबादी को यह नागवार गुजरा। वो पहली लहर थी फिर भी लोग बीमार पड़े काफी बड़ी संख्या में मौतें हुईं। जो लोग ठीक भी हो गए उनमें कोई न कोई निशानी बीमारी के रूप में कोविड छोड़ा गया। लेकिन जब दूसरी लहर आयी तो बहुत ही भयानक थी लाशों के ढेर लग गए। डाक्टरों आक्सीजन सिलंडरों वेंटिलेटरों की कमी पड़ गई। श्मशानों कब्रिस्तानों में जगह कम पड़ गई। बड़ी संख्या में लोगों ने अपने प्रियजनों को खो दिया। लेकिन तीसरी लहर अभी बाकी थी। तब तक ओमिक्रान के रूप में वायरस का नया वैरिएंट सामने आया। दक्षिण अफ्रीका से चलकर यूरोपियन कंट्रीज होता हुआ ये वायरस अब भारत में प्रवेश करने के बाद फैलना शुरू कर चुका है। कोरोना को लेकर तमाम लोग अभी तक नहीं चेते हैं न तो उन्होंने वैक्सीन लगवाई है न वह कोरोना को गभीरता से ले रहे हैं। लेकिन अब ऐसे लोगों की मुसीबत बढ़ने वाली है। ये एक राष्ट्रीय संकट की घड़ी है जिन लोगों के वैक्सीन लग चुकी है या जिनके दोनों डोज लग चुके हैं उन्हें फिर भी खतरा कम है लेकिन जिन्होंने अभी तक एक भी डोज नहीं लगवाई है उन्हें खतरा ज्यादा है। और उनके चलते उन लोगों को खतरा है जो वैक्सीन लगवा चुके हैं। कोरोना की तीसरी लहर को देखते हुए तमाम राज्यों ने कड़े कदम उठाने शुरू कर दिये हैं। इस क्रम में हरियाणा ने बड़ा कदम उठाया है। हरियाणा के स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज ने कहा है कि 1 जनवरी 22 से जिन लोगों ने दोनों खुराक नहीं ली हैं, उन्हें मैरिज हॉल, होटल, रेस्तरां, कार्यालय, बैंक या किसी अन्य सार्वजनिक स्थान पर प्रवेश करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। सरकार ने यह कदम खुद को ओमिक्रॉन और कोविड की तीसरी लहर से बचाने के लिए उठाए हैं।

बीएसएफ ने एक तस्कर और एक घुसपैठिया मार गिराया, सीमा पर हलचल तेज

सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के जवानों ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर तस्करों पर आंसू गैस के गोले दागे और 6 किलो चांदी के गहने बरामद किए। यह घटना पश्चिम बंगाल के नदिया जिले में बॉर्डर आउट पोस्ट (बीओपी) गोंगरा में हुई, जब बीएसएफ के जवानों ने 20 दिसंबर की सुबह 12 से 15 तस्करों को अंतरराष्ट्रीय सीमा के पास आते देखा। तस्कर बीएसएफ की चेतावनी के बावजूद आगे बढ़ते रहे। जब वे नहीं माने तो सतर्क कर्मियों ने उन पर आंसू गैस के गोले छोड़े।
फायरिंग के बीच तस्कर मौके से फरार हो गए। इसके बाद जवानों ने 6 किलो वजन के चांदी के गहने बरामद किए। जब्त किए गए आभूषण को आगे की कानूनी कार्रवाई के लिए तेहट्टा में सीमा शुल्क विभाग को सौंप दिया गया है। इसके अलावा सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) ने भारत-पाक सीमा पर गुरदासपुर सेक्टर में घुसपैठिए को उस समय मार गिराया जब वह मंगलवार सुबह 6.45 बजे भारतीय क्षेत्र से पार करने की कोशिश कर रहा था। बीएसएफ के अनुसार, घुसपैठिए, जिसकी पहचान अभी तक नहीं हो पाई है, को उस समय मार गिराया गया जब वह भारतीय सीमा से बाड़ पर कूदने की कोशिश कर रहा था। पेट्रोलिंग टीम ने उन्हें चेतावनी दी लेकिन कई बार गुहार लगाने के बाद भी वह नहीं रुके। रिपब्लिकवर्ल्ड के मुताबिक, इससे पहले सोमवार को बीएसएफ ने एक पाकिस्तानी नागरिक को पकड़ा था। उसे पंजाब के डेरा बाबा नानक इलाके में पकड़ा गया था। सुरक्षा बलों ने एक फोन चार्जर के साथ पाकिस्तानी मुद्रा, मोबाइल फोन और ईयरफोन भी बरामद किया। घटना पाकिस्तान के करतारपुर कॉरिडोर के पास हुई। हाल ही में पंजाब पुलिस ने गुरदासपुर जिले की अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से एक टिफिन बम और चार हथगोले बरामद किए थे। रविवार की रात, बीएसएफ ने गुरदासपुर इलाके में एक पाकिस्तानी ड्रोन को देखा और पांच राउंड फायरिंग की, जिससे उसे पाकिस्तान लौटने के लिए मजबूर होना पड़ा।

सिंगापुर में उड़ानों पर लगाई रोक, ये देश होंगे प्रभावित

सिंगापुर सरकार के निर्देश के बाद, सिंगापुर एयरलाइंस 23 दिसंबर 2021 से 20 जनवरी 2022 के बीच आज मध्यरात्रि से सिंगापुर में सभी वैक्सीनेटेड ट्रैवल लेन (VTL) उड़ानों के लिए नई बुकिंग स्वीकार करना बंद कर देगी। सरकार ने ओमिक्रॉन COVID-19 के नये वैरिएंट से जोखिम का हवाला देते हुए कहा है कि टीकाकरण यात्रा कार्यक्रम के तहत, सिंगापुर कुछ देशों से पूरी तरह से टीकाकरण वाले यात्रियों को क्वारंटाइन प्रवेश की अनुमति देता है, जिन्हें नियमित परीक्षण भी करना पड़ता है। अपनी वेबसाइट पर पोस्ट किए गए एक संदेश में, सिंगापुर एयरलाइंस ने कहा है कि 22 दिसंबर 2021 को 2359 बजे (एसजीटी) से, सिंगापुर एयरलाइंस 23 दिसंबर 2021 के बीच निर्धारित सिंगापुर में सभी टीकाकरण यात्रा लेन (वीटीएल) उड़ानों के लिए नई बुकिंग स्वीकार करना बंद कर देगी। और 20 जनवरी 2022 (दोनों तिथियां सम्मिलित) तक यह प्रक्रिया जारी रहेगी। एयरलाइन्स ने कहा है कि वह इस दौरान नई बुकिंग को निलंबित करने के सिंगापुर सरकार के निर्देश का पूरी तरह से पालन करती है।
एयरलाइन्स ने कहा है कि इस अवधि के दौरान वीटीएल उड़ान पर मौजूदा कन्फर्म बुकिंग वाले एसआईए ग्राहक, और टीकाकरण यात्रा पास (यदि लागू हो) के लिए सफलतापूर्वक आवेदन करने वाले ग्राहक इस निर्देश से प्रभावित नहीं हैं और वह अपनी यात्रा पर पूर्व निर्धारित योजनाओं के साथ आगे बढ़ सकते हैं। मौजूदा वीटीएल या परीक्षण आवश्यकताओं में कोई बदलाव नहीं किया गया है, और मौजूदा बुकिंग वाले यात्री सिंगापुर में क्वारंटाइन में प्रवेश कर सकते हैं यदि वे सभी वीटीएल आवश्यकताओं को पूरा करते हैं। इस निर्देश से उन यात्रियों पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जो ग्राहक इस अवधि के दौरान वीटीएल उड़ानों पर सिंगापुर के माध्यम से पारगमन करना चाहते हैं, वे अपनी उड़ानें बुक करना जारी रख सकते हैं। टीकाकरण यात्रा लेन (वीटीएल) कार्यक्रम के तहत, सिंगापुर कुछ देशों से निर्धारित उड़ानों या बसों में पूरी तरह से टीका लगाए गए यात्रियों को क्वारंटाइन फ्री प्रवेश की अनुमति देता है। लेकिन ऐसे यात्रियों को नियमित परीक्षण से गुजरना पड़ता है। सिंगापुर ने ऑस्ट्रेलिया, भारत, यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका सहित लगभग दो दर्जन देशों के लिए इन लेन की स्थापना की है। सरकार ने कहा कि वह 20 जनवरी, 2022 के बाद यात्रा के लिए वीटीएल कोटा और टिकट बिक्री को अस्थायी रूप से कम कर देगी। उड़ानों के लिए, कुल टिकट बिक्री आवंटित कोटे के 50% पर होगी। स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक बयान में कहा कि हमारे सीमा निर्धारित करने संबंधी उपायों से हमें ओमिक्रॉन वैरिएंट का अध्ययन करने और समझने, और हमारी स्वास्थ्य देखभाल क्षमता को बढ़ाने और अधिक लोगों का टीकाकरण करने और इस बढ़ावा देने सहित हमारी प्रतिरक्षा तंत्र को मजबूत करने में मदद मिलेगी।

शनिवार, 2 अक्टूबर 2021

पितृदोष या शापित कुंडली देता है भयानक दुष्परिणाम, मजबूर हो गया मानने को

दोस्तों पिछले दिनों पितृपक्ष में मै गया चला गया। अपने पितरों का श्राद्ध व पिंडदान करने। मेरे परिवार में पिछली सात पीढ़ियों में किसी की गया नहीं हुई जैसा कि मेरी जानकारी है। मेरे पूर्वज गया तीर्थ को मानते थे या नहीं ये तो नहीं पता लेकिन ये कहते सुना जरूर था कि हम नहीं मानते कि लड़के पानी नहीं देंगे तो हम तरेंगे नहीं। लेकिन मेरे परिवार में एक बात बहुत कामन रही कि उम्र की अधेड़ावस्था में आजीविका का संकट खड़ा हो जाता है जोकि इतना भयानक होता है कि पूरा परिवार असतव्यस्त हो जाता है। जहां से मुझे जानकारी है मेरे परबाबा के पिता जी कन्हैया लाल वाजपेयी रानी झांसी के साथ लड़े थे। उनके पुरखे रीवां के किसी गांव से थे जो कि मुझे जानकारी नहीं है लेकिन मेरे बाबा कहा करते थे कि हमारे पुरखे रीवां नरेश के राजगुरु थे। सत्य क्या है नहीं पता। खैर रानी झांसी की पराजय और उनके न रहने पर अंग्रेजों का दमन चक्र चला परिवार को बचाने के लिए वह एक बैलगाड़ी में पुआल के नीचे परिवार को छिपा कर किसी तरह कानपुर में बिठूर के पास रामनगर गांव पहुंचे और यहां परिवार को छोड़कर आजादी की जंग लड़ने चले गए और फिर नहीं लौटे। उनके लड़के सतीदीन वाजपेयी रामनगर जिसे राजस्व गांव बगदौदी बांगर भी कहते हैं वहां सत्ती सूरमा के नाम से मशहूर हुए। सुना है उनके साथ घुड़सवारे दस्ता चलता था और बड़े बड़े जमींदार दंडवत हो जाते थे। 1900 ईसवी के आसपास जब प्लेग फैला तो उसमें उनकी, उनकी पत्नी और बेटी की मौत हो गई थी। जिस तरह आज के दौर में कोरोना मरीज की मौत होने पर उसका शरीर कोई नहीं छूता था उसी तरह से प्लेग थी। कई दिन तक लाशें गांव में पड़ी रहीं फिर कोई कहीं डाल आया। उनके तीन पुत्र थे शंभू, गोविंद और गोपाल। शंभू रूरा के पास गाऊपुर गांव में थे। संभव है प्लेग के डर से गांव न आए हों। लेकिन उनके न आने से बाबा को ऐसी नाराजगी हुई कि उनसे कोई संबंध नहीं रखा। बाद में मेरे बाबा किसी तरह से जब पढ़ लिख गए तो गांव लौटे लेकिन तब तक उनके छोटे भाई गोपाल की भी मृत्यु हो चुकी थी। दादी बाबा अम्मा पिताजी इनकी विधिवत अंत्येष्टि हुई थी। लेकिन मुझसे कई तांत्रिकों और ज्योतिषियों ने कहा आप पर पितृदोष है। आपके साथ आपके पितृ चल रहे हैं। वह अपनी मुक्ति चाहते हैं। अधेड़ावस्था मेंआजीविका का संकट बाबा को भी आया। पिताजी को भी आया। मेरे भैया को भी आया और मुझे भी भोगना पड़ रहा है। इसलिए लोगों के बार बार कहने पर पितृदोष से मुक्ति और पितरों की आत्मा को शांति देने की कामना से मै गया हो आया। सब पितरों को बैठा आया। मन वचन कर्म से यही प्रार्थना है वह मुक्ति पाएं। हमने जो भोगा हमारे बच्चों को इस पितृदोष से मुक्ति मिले। इस बार इतना ही बाकी फिर कभी।

सोमवार, 20 सितंबर 2021

राजकुंद्रा बदनाम हुए तो क्या, नाम तो हो ही गया धंधा भी चमक गया

राज कुंद्रा को जमानत मिल गई है। शिल्पा शेट्टी आज दीपावली मनाएंगी क्योंकि उनके कामशास्त्र के सरताज दूसरे कोका पंडित आज जेल से कामसूत्र के आसनों पर नई कलात्मक दृष्टि लेकर बाहर आए हैं। कामसूत्र का दर्शन देने वाली इस भारत भूमि की धरा पर बहुत नाइंसाफी है कि काम शास्त्र के आसनों पर गहन शोध करने वाले प्रोफेसर को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया। उनके कामसूत्र दर्शन की तमाम नायिकाएं विरहणी हो गई थीं। सोशल मीडिया पर आंसुओं में डूबे उनके उद्गार रह रहकर बाहर आ रहे थे। खुद पत्नी सहधर्मिणी के रूप में शिल्पा शेट्टी को भी पति की इस दृष्टि पर जब कोई एतराज नहीं तो हम कौन होते हैं आपत्ति जताने वाले। बेहतर तो ये होता कि शिल्पा शेट्टी को स्वयं उनके कल्पना संसार की नायिका बनना चाहिए था। लेकिन क्या कहा जाए शायद वह इतनी हिम्मत नहीं जुटा पाईं। राजकुंद्रा पर पोर्नग्राफी को पिक्चराइज कर महिमामंडित किये जाने का आरोप है। तमाम जरूरतमंद रुपहले संसार की शोभा बनने की इच्छुक नायिकाओं को राजकुंद्रा की इस नयी दृष्टि ने एक नया मंच दिया। लेन देन की इस दुनिया में मुफ्त में कुछ नहीं मिलता। इस प्लेटफार्म पर अपनी सेवा देने और सेवा लेने वाला दोनों संतुष्ट हैं। कोई जबर्दस्ती नहीं। कोई व्यभिचार नहीं। देखने वाला पैसा खर्च कर इसका आनंद ले रहा था। और राजकुंद्रा पैसा बना रहे थे। खैर जो भी हो नाम तो हो ही गया। शौकीन लोग ढंढ ढूंढ कर देख रहे हैं।

Votes to select a patriot: शहर चलाने के लिए एक अदद देशभक्त की तलाश, इस देश हो रहा अनोखा चुनाव

रामकृष्ण वाजपेयी सुनने में थोड़ा अटपटा जरूर लग रहा होगा लेकिन आपके पड़ोसी मुल्क चीन के एक शहर हांगकांग में ऐसा होने जा रहा है। हांगकांग की व्यवस्था को चलाने के लिए ऐसा होने जा रहा है। यहां के निवासियों ने रविवार को चुनाव समिति के सदस्यों को चुनने के लिए मतदान किया है और समिति के ये चुने गए सदस्य शहर के देशभक्त नेता का चुनाव करेंगे। हांगकांग के निवासियों के मतदान के बाद चुनी गई ये समिति दिसंबर में होने वाले चुनाव के दौरान शहर की विधायिका के लिए 90 में से 40 सांसदों का चयन करेगी, साथ ही अगले साल मार्च में होने वाले चुनाव के दौरान हांगकांग के नेता का चुनाव करेगी। चीन के प्रति निष्ठावान लोगों की उम्मीदवारी सुनिश्चित करने वाला अपनी तरह का यह पहला चुनाव है। इस चुनाव को बदले हुए कानूनों के तहत कराया जा रहा है। गौरतलब है कि पिछले मई माह में विधायिका ने यह सुनिश्चित करने के लिए हांगकांग के चुनावी कानूनों में संशोधन किया था कि केवल "देशभक्त" लोग जो चीन के प्रति वफादार हैं वही हांगकांग शहर पर शासन करेंगे। इसके लिए चुनाव समिति को भी 1200 से बढ़ाकर 1500 सदस्यों तक कर दिया गया है। इसके अलावा समिति की सीटों के लिए प्रत्यक्ष मतदाताओं की संख्या दो लाख 46 हजार से घटाकर आठ हजार तक कम कर दी गई है। बताया जाता है कि यह परिवर्तन 2019 में बड़े पैमाने पर लोकतंत्र समर्थक विरोध प्रदर्शन के बाद हांगकांग के नागरिक समाज पर की जाने वाली एक व्यापक कार्रवाई का हिस्सा है। अधिकारियों ने चीन की कम्युनिस्ट पार्टी द्वारा लगाए गए एक व्यापक राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के साथ शहर पर नियंत्रण कड़ा कर दिया है, जिसने सरकार के विरोध को प्रभावी ढंग से अपराध बना दिया है। यानी अब हांगकांग में विरोध का स्वर उठाने वाले के साथ अपराधी की तरह बर्ताव किया जाएगा। हांगकांग के कानूनों में हुए इन व्यापक परिवर्तनों ने कई नागरिक संगठनों को भंग करने के लिए मजबूर कर दिया है। ऐसे तमाम संगठनों के नेताओं को गिरफ्तार भी किया गया है। हालांकि इतने सख्त प्रावधानों का विरोध भी हो रहा है। आलोचकों का कहना है कि नये परिवर्तन स्वतंत्रता को प्रतिबंधित करते हैं, हांगकांग से वादा किया गया था कि वह 1997 में औपनिवेशिक ब्रिटेन से चीन को क्षेत्र के हैंडओवर के बाद 50 वर्षों तक बनाए रख सकता है। यूनियनों की कोई ज़रूरत नहीं है? नये कानूनों के मुताबिक अब य़ूनियनों की कोई जरूरत नहीं रह गई है। हांगकांग के सबसे बड़े विपक्षी ट्रेड यूनियन ने रविवार को कहा कि वह अपने सदस्यों की सुरक्षा के लिए चिंताओं से मुक्त हो गए हैं।

Mahesh Bhatt: बेटी से शादी की इच्छा रखने वाला शख्स, विवादों से रहा गहरा नाता

रामकृष्ण वाजपेयी फिल्म निर्माता लेखक महेश भट्ट बॉलीवुड का एक ऐसा नाम है जो 73 साल की उम्र में भी अपने विवादित बयानों के लिए चर्चा में रहते हैं। इनका सबसे सनसनीखेज बयान था अपनी बेटी से शादी की इच्छा का इजहार करना। परवीन बॉबी को सेक्स एडिक्ट बताने वाला बयान। इसके अलावा भी उनके तमाम बयान ऐसे हैं जो उन्हें विवादों में लाते रहे हैं। वर्तमान में वह ट्वीटर से लगभग दो साल से किनारा कसे हुए हैं। पिछले दिनों वह सरबत दा भला चेरिटेबल ट्रस्ट के संचालक मशहूर व्यवसायी डॉ. एसपी ओबराय जिनका पूरा नाम सुरेंदरपाल सिंह ओबराय है के जीवन पर फिल्म लाने की बात कहकर चर्चा में आए थे। डॉ. ओबराय के नाम से अपरिचित लोगों को हम बता दें कि ये वही ओबराय हैं जो विदेशी जेलों में फंसे हिन्दुस्तानियों की घर वापसी करवाने के बाद अफगानिस्तान के रिफ्यूजियों के लिए फरिश्ता बने थे। अगर सबकुछ ठीक रहा तो जल्द ही ओटीटी प्लेटफार्म और बड़े पर्दे पर ओबराय पर फिल्मायी गई फिल्म देखने को मिलेगी। जिस पर तेजी से काम शुरू हो चुका है। कौन हैं महेश भट्ट महेश भट्ट गुजराती हिन्दू पिता नानाभाई भट्ट और मुस्लिम मां शिरिन मोहम्मद अली की संतान हैं। उनकी आरंभिक पढ़ाई डान बास्को स्कूल माटुंगा में हुई। बताया जाता है कि अपनी स्कूली शिक्षा के दिनों में ही उन्होंने गर्मी की छुट्टियों में ही उत्पादों के विज्ञापन के जरिये कमाई शुरू कर दी थी। महेश भट्ट के संघर्ष का दौर इसके बाद एक समय महेश भट्ट के संघर्ष का दौर रहा जब इन्होंने स्मिता पाटिल और विनोद खन्न के सेक्रेटरी के तौर पर काम किया पहला प्यार और तलाक जानने वालों का कहना है कि महेश भट्ट की स्टूडेंट लाइफ में ही उन्हें लोरिएन ब्राइट नाम की लड़की से प्यार हो गया। जिसने बाद में अपना नाम बदलकर किरन भट्ट कर लिया। यही किरन भट्ट पूजा भट्ट की मां हैं। लेकिन एक समय ऐसा आया जब यह रिश्ता टूटना शुरू हुआ ये समय था महेश भट्ट की जिंदगी में परवीन बॉबी की एंट्री का। लेकिन परवीन बॉबी के साथ महेश भट्ट के रिश्ते टिकाऊ नहीं रहे और जल्द ही वह उकता गए इसके बाद उनकी जिंदगी में सोनी राजदान की एंट्री हुई। इस समय तक उनका किरन से तलाक नहीं हुआ था इसलिए इस शादी के लिए वह मुस्लिम बन गए। इस शादी से उन्हें दो बेटियां हुईं शाहीन भट्ट और आलिया भट्ट। आलिया भट्ट नामी एक्ट्रेस हैं। फिल्मों में कौन लाया महेश भट्ट को इस बुजुर्ग डायरेक्टर को फिल्मी दुनिया में प्रवेश देने का श्रेय राजखोसला को जाता है। जिनके साथ इन्होंने असिस्टेंट डायरेक्टर के रूप में काम किया। कहा जाता है कि फिल्म कब्जा से उन्होंने निर्देशक के रूप में काम करना शुरू किया। लेकिन बहुत दिन तक महेश भट्ट जैसे क्रिएटिव आदमी का यह साथ नहीं चला चूंकि उनकी सोच लीक से हटकर फिल्में बनाने की थी। महेश भट्ट के सुनहरे दौर की शुरुआत 26 साल की उम्र में 1974 में मंजिलें और भी हैं फिल्म से महेश भट्ट ने निर्देशन की शुरूआत की। 1979 में उनकी लहू के दो रंग फिल्म आई जिसमें शबाना आजमी और विनोद खन्ना ने अभिनय किया। इस फिल्म को दो फिल्म फेयर अवार्ड मिले। लेकिन 1982 में आई फिल्म अर्थ से इन्हें सबसे ज्यादा आलोचना और प्रसिद्धि मिली। 1984 मे फिल्म सारांश ने इन्हें स्थापित कर दिया। इसके बाद 1985 में फिल्म जन्म आई। इसके बाद इनकी बड़ी फिल्म थी 1990 में आशिकी। जो कि व्यावसायिक स्तर पर सफल फिल्म रही। इसके बाद 1991 में महेश भट्ट ने बेटी पूजा भट्ट को दिल है कि मानता नहीं फिल्म से लांच किया जिसे अभूतपूर्व सफलता मिली। एक निर्देशक के रूप में महेश भट्ट की 1999 में आई फिल्म कारतूस थी। इससे पहले 1993 में फिल्म सर, 1996 में दस्तक, 1998 में डुप्लीकेट और जख्म। महेश दार्शनिक यूजी कृष्णमूर्ति को अपनी लाइफलाइन मानते हैं और उन्होंने उनकी बायोग्राफी भी लिखी है। कई किताबों का उन्होंने संपादन भी किया है। कृष्णमूर्ति पर उनकी आखिरी किताब 2009 में प्रकाशित हुई थी।